हरियाणा के जीन्द से उठा ये लड़का । आज दुनिया में गुँजता है नाम ...........

October 22, 2020 Add Comment


भारतीय क्रिकेट टीम के युवा युज्वेंद्र चहल का जीवन सफ़र | Yuzvendra Chahal Biography and Journey to team india

आज हम आपके लिए लाये है एक ऐसे इन्सान की कहानी जिसने भारतीय क्रिकेट टीम में आते ही तहलका मचा दिया. भारतीय टीम में एक नई उर्जा को स्थापित किया. जी हाँ, दोस्तों हम बात कर रहे है युज्वेंद्र चहल की, जिन्होंने भारतीय टीम में आते ही अपने करियर को बुलंदी पर पहुँचा दिया. तो चलिए शुरू जानते है उनके बारे मे.

युज्वेंद्र चहल का जीवन परिचय (Yuzvendra Chahal Biography in hindi)

युज्वेंद्र चहल का जन्म 23 जुलाई 1990 को जींद, हरियाणा में एक मध्यम वर्ग परिवार में हुआ था. उनके पिताजी के.के.चहल पेशे से वकील है और उनकी माँ एक घरेलु महिला है. युज्वेंद्र परिवार में सबसे छोटे है उनकी 2 बड़ी बहनें है जो ऑस्ट्रेलिया में रहती है.

Yuzvendra Chahal Biography, story, lifestyle


यदि हम युज्वेंद्र चहल की पढाई को लेकर बात करे तो उन्होंने अपनी पढ़ाई जींद के ही DAVC पब्लिक स्कूल से पूरी हुई. युज्वेंद्र का मन पढाई में बिलकुल नहीं लगता था लेकिन वह क्रिकेट और चेस को बहुत पसंद करते थे. इसीलिए मात्र 7 साल की उम्र में ही उन्होंने चेस खेलना शुरू कर दिया और साथ ही क्रिकेट खेलने की भी शुरुवात की.

युज्वेंद्र चहल और शतरंज (Yuzvendra Chahal and Chess)

देखते ही देखते वह अपने जूनून और कठिन परिश्रम के कारण वह अपने ही क्षेत्र के चेस मास्टर को मत देने लगे. इसी वजह से उन्हें मात्र 10 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर शतरंज में अपना जौहर दिखाने का मौका मिला. जहां उन्होंने 2002 में राष्ट्रीय स्तर पर की जाने वाली बाल चेस प्रतियोगिता को जीत कर चैंपियन होने का ख़िताब अपने नाम किया. ये उनकी पहली राष्ट्रीय चैंपियन ट्रॉफी थी.

Yuzvendra Chahal Biography, story, lifestyle

इस ख़िताब की वजह से पहली बार उन्हें अन्तराष्ट्रीय स्तर पर ग्रीस में आयोजित जूनियर वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप में भारत के लिए खेलने का मौका मिला. इसके आलावा युज्वेंद्र अंडर 16 नेशनल चेस चैंपियनशिप का भी हिस्सा रह चुके है.

युज्वेंद्र चहल और क्रिकेट (Yuzvendra Chahal and Cricket)

वर्ष 2006 में उनके करियर का सबसे ख़राब दौर आया उन्हें अपने चेस गेम के लिए स्पोंसर मिलना बंद हो गये. उनके सामने सबसे बड़ी विपदा आई वो थी पैसा. चेस ऐसा खेल था जिसमे उनका हर साल 50 से 60 हजार सालाना खर्च होता था. चहल के सामने समस्या ये थी कि वो कैसे इतने पैसे इस खेल के लिए जुटा पाएँगे. इसीलिए उन्होंने फैसला लिया की अब वो आगे चेस नहीं खेलेंगे और उन्होंने इस खेल को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया.

उसके बाद चहल ने क्रिकेट को ही अपना लक्ष्य बना लिया और क्रिकेट में जी तोड़ मेहनत करना शुरू कर दी. चहल अपनी लाइफ में कभी मेहनत करने से नही चुकते थे और कहते है कि जो मेहनत करता है उसे भगवान जरुर फल देता है. ऐसा ही कुछ हुआ चहल के करियर में.



युज्वेंद्र चहल का टीम इंडिया तक का सफ़र (Yuzvendra Chahal Journey in Cricket)

चहल की ज़िन्दगी में आईपीएल एक बेहतरीन मौका और मोड़ लेकर आया था. चहल को पहली बार 2011 IPL में मुंबई इंडियन ने ख़रीदा था. चहल 2011 के IPL में खेलने का कुछ खास मौका नहीं मिला पूरे आईपीएल में सिर्फ 1 ही मैच में दिखाई दिए. बता दे कि चहल को उल्टे हाथ के स्पिन गेंदबाज़ के तौर पर टीम में लिया गया था. चहल फिर भी हार नहीं मानी और अपने खेल में और सुधार करना शुरू कर दिया. उसी मेहनत की वजह से CHAMPION LEAGUE TWENTY-20 में अपनी टीम की तरफ से सभी मैच खेलने का मौका मिला और जहां उन्हें हरभजन सिंह से एक गेंदबाज़ के तौर पर बहुत कुछ सिखने को मिला.


चहल ने इस लीग के फाइनल में 3 ओवर में 9 रन देकर 2 विकेट लिए थे. और उसका नतीजा ये हुआ की 2014 की आईपीएल नीलामी में ROYAL CHALANGERS BANGLORE ने 10 लाख रुपये में ख़रीदा था. जिसमे उन्होंने बेहतरीन खेल दिखाया.

Yuzvendra Chahal Biography, story, lifestyle

उनकी लगातार अच्छी परफॉरमेंस की वजह से उनकी लाइफ में नया मोड़ आया. 2016 में पहली बार ज़िम्बाम्वे के खिलाफ भारतीय क्रिकेट टीम की तरफ से खेलने का मौका मिला. इस सीरिज में उन्होंने संतोष पूर्ण खेल दिखाया. 2016 IPL में उन्होंने 21 विकेट चटकाए और भुवनेश्वर कुमार के बाद दुसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ बने.

जो अपनी मदद करता है भगवान भी उसकी मदद करता है ऐसा ही कुछ चहल के साथ हुआ. भारतीय टीम इतनी सशक्त थी कि उसमे चहल के लिए कहीं जगह नहीं बन पा रही थी. फिर आया एक दिन जब टीम इंडिया इंग्लैंड के खिलाफ मैच खेल रही थी. 3 मैचो की टेस्ट की सीरिज के बाद रविन्द्र जडेजा और अश्विन को T20 सीरिज में आराम दे दिया गया और वहीँ उनकी जगह 2 खिलाड़ियों को मौका दिया गया उसमे एक नाम युज्वेंद्र चहल भी था. चहल ने उस मौके का फायदा उठाया और बेहतरीन खेल खेलते हुए भारतीय क्रिकेट इतिहास में अपना नाम अव्वल दर्जे पर लिख दिया.

Yuzvendra Chahal Biography, story, lifestyle

उन्होंने एक लेग स्पिनर के तौर पर T20 इंटरनेशनल में 25 रन देकर 6 विकेट लिए जो T20 का सर्वश्रेष्ट रिकॉर्ड था. उसके बाद चहल का खेल उनका साथ देता रहा और वो फिर नहीं कभी नहीं रुके.

कहते है जो होता है अच्छे के लिए होता हैं जीवन में जो भी कठिनाई आये उसका सामना हँसकर करना चाहिए. उसका एक उदहारण चहल भी है. यदि उस दिन चहल चेस को अलविदा नहीं कहा होता तो आज इंडियन टीम को इतना अच्छा खिलाड़ी नहीं मिलता ।

Conditions IRCC put in front of DLIs to get approval for COVID readiness plan to welcome International students again ..............

October 20, 2020 Add Comment
Conditions IRCC put in front of DLIs to get approval for COVID readiness plan to welcome International students again ..............

Welcome Back to Canada!


Travel restrictions for international students will be lifted at schools with COVID-19 readiness plans starting October 20.


Starting October 20, travel restrictions for international students will be lifted at schools with COVID-19 readiness plans.

Canada welcomes back international students

If you're a student from abroad hoping to travel to Canada to study at a university or college, we've got good news. Starting October 20, Canada will begin welcoming back international students!

This means if you're coming to Canada to study, and your school has a COVID-19 readiness plan in place, you'll be exempt from travel restrictions. Your school's COVID-19 readiness plan must be approved by provincial health authorities before you can travel.

This change applies to all international students, regardless of your country of origin or when you received your study permit. Just be sure you don't make travel plans until you've met all the requirements and your school has approval from provincial health authorities.

Provincial approval for schools

Each province will have different rules and guidelines for how they'll review and approve readiness plans for schools. If your school isn't on the list of approved institutions, you won't be able to travel to Canada just yet.

To qualify, schools must have plans in place to share health and travel info with you, the student, as well as put together a quarantine plan. You'll still have to quarantine yourself for fourteen days after arriving in Canada, and your school should be prepared to help you do so. This includes assuring you have access to food and medication during your mandatory quarantine.

A list of universities and colleges with approved COVID-19 readiness plans is updated frequently on the federal government's website.

You can reach out to your school to ask about current COVID-19 readiness plans. You'll want to ask about accomodation for international students undergoing quarantine, too. 

Immediate family members

You may be able to travel to Canada with an immediate family member, if they're coming to support you in your studies. This could mean a parent, a spouse or common-law partner, or a dependent.

This is great news if you need some family support while studying in Canada. Of course, your family member will also need to quarantine on arrival.

Post-graduate work permit

If you're graduating from a Canadian program with a degree, diploma, or certificate, you have six months to apply for a post-graduate work permit (PGWP), which lets you stay in Canada to work. Due to the pandemic, the government has loosened restrictions, so even if you pursued your courses online, you can still qualify. Learn more about the PGWP program here.

More information still to come

More details about the program will continue to emerge leading up to, and after, the October 20 launch. We'll keep you updated as information becomes available. 


Jio + PUBG : PUBG comeback this date...

September 23, 2020 1 Comment
Jio + PUBG : PUBG comeback this date...

Report: Reliance in Talks to Publish PUBG MOBILE in India

PUBG MOBILE may be unavailable in India right now but the owners of the popular battle royale game are reportedly in talks to resurrect it in the region.

The Indian Government’s decision to ban PUBG MOBILE in the country has been the major story from the subcontinent over the last few weeks, particularly due to the impact the title had on the region. Not only was India the biggest market for it, but the virality of the title led to the establishment of a solid esports ecosystem that attracted the likes of Fnatic and TSM to set up camp in the country.  

With India’s esport industry built largely on the back of PUBG MOBILE’s popularity, the ban has left a massive gap in the community with streamers, professional players, tournament organizers, and fans all wondering what is to come next. 

India’s ban on the Tencent-published title comes amidst escalating tensions between India and China and an increased scrutiny towards Chinese tech products and investments in the country. While Indian authorities have cited user security and data privacy concerns in their official statements, there is a case to be made that this is part of a larger move to apply political pressure on China. A week after the ban, PUBG Corp. announced that it would be taking over the publishing rights for the game in India as a way to distance the title from China. However, there has been no news of the game being unbanned since then. 


It became increasingly obvious that PUBG Corp. would require an Indian partner to help with the execution and logistics of operating a game in a region with more than 33M active players. Recent reports across various Indian media outlets suggest that PUBG Corp is in talks with Reliance for the same. A Business Today article reported that Reliance was in talks with PUBG Corp. to serve as partners to help bring back the game to the region. The report went as far as to say that the discussions were in an “advanced stage” with the two companies negotiating revenue share and plans for localization. 

The news is strengthened by the fact that Reliance chairman, Mukesh Ambani spoke highly about the gaming industry in a conversation with Microsoft CEO, Satya Nadella at a summit in Mumbai, earlier this year. He believes that the gaming industry will be bigger than the film, television, and music industries put together. While India was the biggest market for PUBG MOBILE in terms of player base, it wasn’t the market that generated the largest amount of revenue for the title. However, the country has one of the youngest demographics in the world and rapidly improving internet and tech infrastructure, making it one of the fastest-growing gaming markets in the world. 

VFS for Canada in India will reopen in Chandigarh, Delhi,Mumbai &Bengluru from this date .....

September 17, 2020 Add Comment
  • Canada Visa Application Centres closed temporary 

  • Following Ministerial Instructions issued by the Minister of Citizenship and Immigration of Canada on April 9, April 29, May 19, June 9 and July 1, 2020 applicants can no longer submit an application for temporary residence in paper at the VAC. 

    New Ministerial Instructions issued on July 1, 2020 have extended this measure until September 30, 2020. All applications for temporary residence must continue to be submitted online via IRCC’s website: https://www.canada.ca/en/
    services/immigration-citizenship.html


    If you submitted an application for temporary residence in paper to the VAC on or after April 10, 2020, your application will be returned to you.
    Please note that as of July 1, 2020, the Minister of Citizenship and Immigration of Canada has also lifted the suspension on the processing of temporary resident visa (visitor visa) applications. Although processing of applications has resumed, travel restrictions to Canada remain in place. For more details, visit the IRCC website.
    Canada has stopped accepting visa applications until further notice in Wuhan (China), Rome (Italy), Ankara & Istanbul (Turkey), Niamey (Niger), Bamako (Mali), Recife (Brazil), Doha (Qatar), Montevideo (Uruguay), Erbil (Iraq), Guatemala City (Guatemala), Kigali (Rwanda) Dublin (Ireland), London (UK), Kinshasa (DR Congo), Lima (Peru), Los Angeles (USA), La Paz (Bolivia), Santiago (Chile), Caracas (Venezuela), Amman (Jordan), Cebu & Manila (Philippines), Yerevan (Armenia), Bridgetown (Barbados), Kingston & Montego Bay (Jamaica), Antananarivo (Madagascar), Harare (Zimbabwe), Santa Domingo (Dominican Republic), Kathmandu (Nepal), Nur-Sultan (Kazakhstan), Dushanbe (Tajikistan), Brasilia (Brazil), Novosibirsk & Yekaterinburg (Russia), Jakarta (Indonesia), Tegucigalpa (Honduras), Bali (Indonesia), Port Au Prince (Haiti), Dublin (Ireland), Colombia, Asuncion (Paraguay), Lviv & Kiev (Ukraine), and Tbilisi (Georgia), Kuwait City (Kuwait), Muscat (Oman), Mexico City (Mexico), San Jose (Costa Rica), Managua (Nicaragua), Porto Alegre (Brazil), Port Louis (Mauritius), La Paz (Bolivia), Dakar (Senegal), Pristina (Kosovo), Abidjan (Ivory Coast), Conakry (Guinea), Quito (Ecuador), Tegucigalpa (Honduras), San Salvador (El Salvador), Panama City (Panama), Sao Paulo (Brazil), Buenos Aires and Mendoza (Argentina), Dusseldorf and Singapore, Bishkek (Kyrgyzstan), New Delhi, Chandigarh, Jalandhar, Kolkata, Ahmedabad, Mumbai, Pune, Bengaluru, Hyderabad and Chennai (India), Moscow, Rostov-on-Don, St. Petersburg, Vladivostok, Novosibirsk and Yekaterinburg (Russia), Rio de Janeiro (Brazil), Bogota, Medellin and Cali (Colombia) and Dhaka, Chittagong and Sylhet (Bangladesh).

    In India, 90% chances are to open VAC from 1st October. If it delays then there are 100% surety that Visa Application Centres in India Will resume operations from or before 10th October .

तो इतने दिनों में आ जाएगी भारत में कोरोना वायरस की वैक्सीन ...........

September 15, 2020 Add Comment

 

कोरोना वैक्सीन: भारत में '73 दिनों' में वैक्सीन मिलने के दावे का सच क्या है


   






कोरोना वैक्सीन
Image captionचीनी कंपनी सिनोवैक बायोटैक की वैक्सीन का ट्रायल साउथ ब्राज़ील के साओ लुकास हॉस्पीटल में

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक कोरोना वायरस की वैक्सीन को तैयार करने के लिए दुनिया भर में 170 से ज़्यादा जगहों पर कोशिश चल रही है.

इन 170 जगहों में 138 कोशिशें अभी प्री क्लिनिकल दौर में हैं. लेकिन कईयों का क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है. 25 वैक्सीन का ट्रायल बहुत छोटे दायरे वाले फेज वन में चल रहा है. जबकि थोड़े बड़े दायरे में 15 वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है.

लेकिन दुनिया की नज़रें उन कोशिशों पर टिकी हैं जहां फेज तीन का ट्रायल चल रहा है. यह मौजूदा समय में सात जगहों पर चल रहा है.

इन सबके बीच शनिवार को भारतीय मीडिया में 73 दिनों के भीतर कोरोना वैक्सीन उपलब्ध होने की ख़बर सुर्खियों में आ गई.

भारतीय मीडिया रिपोर्ट्स के दावे के मुताबिक ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में तैयार हो रही वैक्सीन को भारत में मुहैया कराने वाली सीरम इंस्टीट्यूट की ओर से यह दावा किया गया, हालांकि रविवार को सीरम इंस्टीट्यूट ने इसको लेकर स्पष्टीकरण जारी करते हुए 73 दिनों की बात को मिसलिडिंग बताया.

सीरीम इंस्टीट्यूट की ओर से बताया गया है कि इस वैक्सीन के तीसरे चरण का ट्रायल किया जा रहा है और अभी केवल इसके भविष्य को ध्यान में रखते हुए उत्पादन की मंजूरी मिली है. वैक्सीन बनाने के लिए दुनिया की शीर्ष कंपनियों में शुमार सीरम इंस्टीट्यूट ने यह भी कहा है कि जब वैक्सीन के ट्रायल पूरी तरह संपन्न हो जाएगा, वैक्सीन को मानकों से मंजूरी मिलेगी तब उसकी उपलब्धता की जानकारी दी जाएगी.


भारत की दावेदारी- 'Covaxin', Covishield

इससे पहले 15 अगस्त को लाल क़िले से अपने संबोधन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश में तीन कोरोना वैक्सीन के ट्रायल की बात कही है. सीरम इंस्टीट्यूट के अलावा भारत में दो वैक्सीन पर काम चल रहा है.

भारत बायोटैक इंटरनेशनल लिमिटेड की वैक्सीन का नाम कोवैक्सीन है. दूसरा वैक्सीन प्रोजेक्ट ज़ाइडस कैडिला हेल्थकेयर लिमिटेड का है. कोवैक्सीन के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट में सरकारी एजेंसी इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी शामिल हैं.

इसके ह्यूमन ट्रायल के लिए देश भर में 12 संस्थाओं को चुना गया है, जिनमें रोहतक की पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़, हैदराबाद की निज़ाम इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ शामिल हैं.

आईसीएमआर के महानिदेशक डॉक्टर बलराम भार्गव ने पिछले दिनों इन 12 संस्थाओं के प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर्स से कोवैक्सीन ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल की रफ़्तार में तेज़ी लाने की बात कही थी. उन्होंने कहा था कि ये शीर्ष प्राथमिकता वाली परियोजनाओं में से एक है, जिस पर सरकार के शीर्ष स्तर से निगरानी रखी जा रही है.

लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स इस पर सवाल उठा रहे हैं कि वैक्सीन तैयार करने के लिए जितने समय की ज़रूरत होती है और जिन प्रक्रियाओं से गुजरना होता है, क्या उनका पालन किया गया है.

वैसे मोटे तौर पर अनुमान लगाया जा रहा है कि अगर जल्दी से वैक्सीन मिला भी तो भी इस साल के अंत तक ही मिल पाएगा. भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने भी साल के अंत तक कोरोना वैक्सीन मिलने की उम्मीद जताई है.


रूस का पहली वैक्सीन बनाने का दावा

बहरहाल, कोरोना वैक्सीन को लेकर अब तक की सबसे बड़ी कामयाबी का एलान 11 अगस्त, 2020 को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने किया. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दावा किया है कि उनके वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस की ऐसी वैक्सीन तैयार कर ली है जो कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ कारगर है.

पुतिन ने कहा कि इस टीके का इंसानों पर दो महीने तक परीक्षण किया गया और ये सभी सुरक्षा मानकों पर खरा उतरा है. इस वैक्सीन को रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी मंजूरी दे दी है. लेकिन यह वैक्सीन अभी तक वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन के मानकों पर स्वीकृत नहीं हुआ है.

गेमलया इंस्टीट्यूट में विकसित इस वैक्सीन के बारे में उन्होंने कहा कि उनकी बेटी को भी यह टीका लगा है. इस वैक्सीन को गेमलया इंस्टीट्यूट के साथ रूसी रक्षा मंत्रालय ने विकसित किया है. माना जा रहा है कि रूस में अब बड़े पैमाने पर लोगों को यह वैक्सीन देनी की शुरुआत होगी. रूसी मीडिया के मुताबिक़ 2021 में जनवरी महीने से पहले दूसरे देशों के लिए ये उपलब्ध हो सकेगी.

समाचार एजेंसी रायटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक रूस में सितंबर से इस वैक्सीन स्पुतनिक v का अद्यौगिक उत्पादन शुरू किया जाएगा. इसी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दुनिया भर के 20 देशों से इस वैक्सीन के एक अरब से ज़्यादा डोज के लिए अनुरोध रूस को मिल चुका है. रूस हर साल 50 करोड़ डोज बनाने की तैयारियों में जुटा है.

हालाँकि रूस ने जिस तेज़ी से कोरोना वैक्सीन विकसित करने का दावा किया है, उसको देखते हुए वैज्ञानिक जगत में इसको लेकर चिंताएँ भी जताई जा रही हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत दुनिया के कई देशों के वैज्ञानिक अब खुल कर इस बारे में कह रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि उसके पास अभी तक रूस के ज़रिए विकसित किए जा रहे कोरोना वैक्सीन के बारे में जानकारी नहीं है कि वो इसका मूल्यांकन करें.

पिछले हफ़्ते विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रूस से आग्रह किया था कि वो कोरोना के ख़िलाफ़ वैक्सीन बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय गाइड लाइन का पालन करे.

रूस के दावे पर शंका

विश्व स्वास्थ्य संगठन के तहत जिन सात वैक्सीन का तीसरे चरण का ट्रायल चल रहा हैं, उनमें रूस की वैक्सीन का ज़िक्र नहीं है. विश्व के दूसरे देश इसलिए भी रूस की वैक्सीन को लेकर थोड़े आशंकित हैं.

दरअसल जिस कोरोना वैक्सीन को बना लेने का दावा रूस कर रहा है, उसके पहले फेज़ का ट्रायल इसी साल जून में शुरू हुआ था.

Image copyrightREUTERS
व्लादिमीर पुतिन

रूस में विकसित इस वैक्सीन के ट्रायल के दौरान के सेफ़्टी डेटा अभी तक जारी नहीं किए गए हैं. इस वज़ह से दूसरे देशों के वैज्ञानिक ये स्टडी नहीं कर पाए हैं कि रूस का दावा कितना सही है.

रूस ने कोरोना के अपने टीके को लेकर उठी अंतरराष्ट्रीय चिंताओं को ख़ारिज करते हुए इसे 'बिल्कुल बेबुनियाद' बताया है. जानकारों ने रूस के इतनी तेज़ी से टीका बना लेने के दावे पर संदेह जताया. जर्मनी, फ़्रांस, स्पेन और अमरीका में वैज्ञानिकों ने इसे लेकर सतर्क रहने के लिए कहा.

इसके बाद रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराश्को ने रूसी समाचार एजेंसी इंटरफ़ैक्स से कहा, "ऐसा लगता है जैसे हमारे विदेशी साथियों को रूसी दवा के प्रतियोगिता में आगे रहने के फ़ायदे का अंदाज़ा हो गया है और वो ऐसी बातें कर रहे हैं जो कि बिल्कुल ही बेबुनियाद हैं."

अमरीका में देश के सबसे बड़े वायरस वैज्ञानिक डॉक्टर एंथनी फ़ाउची ने भी रूसी दावे पर शक जताया है. डॉक्टर फ़ाउची ने नेशनल जियोग्राफ़िक से कहा, "मैं उम्मीद करता हूँ कि रूसी लोगों ने निश्चित तौर पर परखा है कि ये टीका सुरक्षित और असरकारी है. मुझे पूरा संदेह है कि उन्होंने ये किया है."

रूस की इस वैक्सीन से इतर इस समय कोरोना महामारी के ख़िलाफ़ दुनिया भर में वैक्सीन विकसित की लगभग 23 परियोजनाओं पर काम चल रहा है. लेकिन इनमें से कुछ ही ट्रायल के तीसरे और अंतिम चरण में पहुँच पाई हैं और अभी तक किसी भी वैक्सीन के पूरी तरह से सफल होने का इंतज़ार ही किया जा रहा है. इनमें ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, मॉडर्ना फार्मास्युटिकल्स, चीनी दवा कंपनी सिनोवैक बॉयोटेक के वैक्सीन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स अहम हैं.

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैक्सीन प्रोजेक्ट ChAdOx1 में स्वीडन की फार्मा कंपनी एस्ट्राज़ेनेका भी शामिल है. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की कोविड वैक्सीन के ट्रायल का काम दुनिया के अलग-अलग देशों में चल रहा है.

मई के महीने में विश्व स्वास्थ्य संगठन की चीफ़ साइंटिस्ट सौम्या विश्वनाथन ने ऑक्सफोर्ड के प्रोजेक्ट को सबसे एडवांस कोविड वैक्सीन कहा था. इंग्लैंड में अप्रैल के दौरान इस वैक्सीन प्रोजेक्ट के पहले और दूसरे चरण के ट्रायल का काम एक साथ पूरा किया गया.

Image copyrightREUTERS
वैक्सीन

18 से 55 साल के एक हज़ार से ज़्यादा वॉलिंटियर्स पर किए गए ट्रायल में वैक्सीन की सुरक्षा और लोगों की प्रतिरोधक क्षमता का जायजा लिया गया था. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का ये वैक्सीन प्रोजेक्ट अब ट्रायल और डेवलपमेंट के तीसरे और अंतिम चरण में है.

ऑक्सफोर्ड कोविड वैक्सीन के ट्रायल के इस चरण में क़रीब 50 हज़ार वॉलिंटियर्स के शामिल होने की संभावना है. दक्षिण अफ्रीका, अमरीका, ब्रिटेन और ब्राज़ील जैसे देश ट्रायल के अंतिम चरण में भाग ले रहे हैं.

भारत की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया ने भी ऑक्सफोर्ड कोविड वैक्सीन के भारत में इंसानों पर परीक्षण की तैयारी में है.

अगर अंतिम चरण के नतीजे भी सकारात्मक रहे, तो ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च टीम साल के आख़िर तक ब्रिटेन की नियामक संस्था 'मेडिसिंस एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी' (एमएचआरए) के पास रजिस्ट्रेशन के लिए साल के आख़िर तक आवेदन करेगी.

अमरीका की मॉडर्ना कोविड वैक्सीन

बीते 15 जुलाई को अमरीका में टेस्ट की जा रही कोविड-19 वैक्सीन से लोगों के इम्युन को वैसा ही फ़ायदा पहुंचा है जैसा कि वैज्ञानिकों को उम्मीद थी. हालांकि अभी इस वैक्सीन का अहम ट्रायल होना बाक़ी है.

अमरीका के शीर्ष विशेषज्ञ डॉ. एंथोनी फाउची ने समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस से कहा,''आप इसे कितना भी काट-छांट कर देखो तब भी ये एक अच्छी ख़बर है.' माना जा रहा है कि मॉडर्ना वैक्सीन प्रोजेक्ट अपने अंतिम चरण के शुरुआती हिस्से में है. मॉडर्ना ट्रायल के इस चरण में 30 हज़ार लोगों पर इस वैक्सीन का परीक्षण करेगी.


कोविड-19

विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर किसी नए प्रोडक्ट का परीक्षण तभी किया जाता है, जब वो नियामक एजेंसियों के पास मंज़ूरी के लिए दाखिल किए जाने के आख़िरी दौर में हो. राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भी कोरोना वायरस के लिए इसे अब तक की सबसे तेज़ वैक्सीन प्रोजेक्ट करार दिया है.

मॉडर्ना के क्लीनिकल ट्रायल में अमरीका का नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ हेल्थ (एनआईएच) भी शामिल है. एनआईएच के निदेशक फ्रांसिस कोलिंस का कहना है कि साल 2020 के आख़िर तक कोरोना की वैक्सीन बना लेने का लक्ष्य रखा गया है.

मॉडर्ना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्टीफन बांसेल ने बताया, "मुझे उम्मीद है कि मॉडर्ना की वैक्सीन अमरीकी एजेंसी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के मापदंडों पर 75 फ़ीसदी तक खरी उतरेगी. हमें उम्मीद है कि ट्रायल में हमारी वैक्सीन कोरोना को रोकने में कामयाब होगी और हम इससे महामारी को ख़त्म कर पाएँगे."

नेशनल इंस्टिट्यूट्स ऑफ़ हेल्थ और मोडेरना इंक में डॉ. फाउची के सहकर्मियों ने इस वैक्सीन को विकसित किया है. 27 जुलाई से इस वैक्सीन का सबसे अहम पड़ाव शुरू हो चुका है. तीस हज़ार लोगों पर इसका परीक्षण किया जा रहा है और पता किया जाएगा कि क्या ये वैक्सीन वाक़ई कोविड-19 से मानव शरीर को बचा सकती है.

चीन भी है वैक्सीन के होड़ में

चीन की प्राइवेट फार्मा कंपनी सिनोवैक बॉयोटेक जिस कोविड वैक्सीन प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, वो ट्रायल के तीसरे और आख़िरी चरण में पहुँच चुकी है. सरकारी मंजूरी से पहले किसी वैक्सीन को इंसानों पर परीक्षण में खरा उतरना होता है.

मॉडर्ना और ऑक्सफोर्ड के बाद ट्रायल के अंतिम चरण में पहुँचने वाला ये दुनिया का तीसरा वैक्सीन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट है. CoronaVac नाम की इस वैक्सीन का फ़िलहाल ब्राज़ील में नौ हज़ार वॉलिंटियर्स पर ट्रायल चल रहा है.

चीन में तीन अन्य जगहों पर भी कोरोना वैक्सीन को लेकर चल रहा ट्रायल तीसरे दौर में पहुंच गया है. इसमें एक ट्रायल वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ़ बायोलॉजिकल प्रॉडक्टस में सिनोफ़ार्म कंपनी के साथ संयुक्त तौर पर चल रहा है.

सीनोफॉर्म कंपनी की ओर से एक कोशिश बीजिंग इंस्टीट्यूट ऑफ़ बायोलाजिकल प्राडक्टस में भी हो रही है. बीजिंग के ही एक अन्य इंस्टीट्यूट बीजिंग इंस्टीट्यूट ऑफ़ बायोटैक्नालॉजी में कैनसिनो बायोलॉजिकल इंक भी कोरोना वैक्सीन बनाने की कोशिशों में जुटा है. यहां दो चरण का ट्रायल पूरा हो चुका है और तीसरे चरण का ट्रायल शुरू होने वाला है.


वैक्सीन

वैक्सीन बनाने को लेकर अब तक कितनी प्रगति हुई है?

जिन सात जगहों पर तीसरे चरण का ट्रायल चल रहा है उसमें प्राइवेट कंपनियों की ओर से की जा रही कोशिश भी है. अमरीकी फार्मा कंपनी 'फ़ाइज़र' और जर्मन कंपनी 'बॉयोएनटेक' मिलकर एक कोविड वैक्सीन प्रोजेक्ट BNT162b2 पर काम कर रही हैं. दोनों कंपनियों ने एक साझा बयान जारी कर बताया है कि वैक्सीन प्रोजेक्ट इंसानों पर परीक्षण के आख़िरी चरण में पहुँच गई है. अगर ये परीक्षण सफल रहे, तो अक्तूबर के आख़िर तक वे सरकारी मंज़ूरी के लिए आवेदन दे सकेंगे. कंपनी की योजना साल 2020 के आख़िर तक वैक्सीन की 10 करोड़ और साल 2021 के आख़िर तक 1.3 अरब खुराक की आपूर्ति सुनिश्चित करने की है.

इसका अलावा शीर्ष दवा कंपनियां सनफई और जीएसके ने भी वैक्सीन विकसित करने के लिए आपस में तालमेल किया है. ऑस्ट्रेलिया में भी दो संभावित वैक्सीन का नेवलों पर प्रयोग शुरू हुआ है. माना जा रहा है कि इसका इंसानों पर ट्रायल अगले साल तक शुरू हो पाएगा.

जापानी की मेडिकल स्टार्टअप एंजेस ने कहा है कि उसने कोरोना वायरस की संभावित वैक्सीन का इंसानों पर परीक्षण शुरू कर दिया है. जापान में इस तरह का यह पहला परीक्षण है. कंपनी ने कहा है कि ओसाका सिटी यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में अगले साल 31 जुलाई तक ट्रायल जारी रहेंगे.

लेकिन कोई यह नहीं जानता है कि इनमें से कोई सी कोशिश कारगर होगी. विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख भी कई बार वैक्सीन बनाए जाने को लेकर नाउम्मीदी भी ज़ाहिर कर चुके हैं.

कोरोना वायरस की वैक्सीन इतनी अहम क्यों है?

आशंका यह है कि दुनिया की आबादी का एक बड़ा हिस्सा कोरोना वायरस की चपेट में आ सकता है. ऐसे में वैक्सीन इन लोगों को कोरोना वायरस की चपेट में आने से बचा सकता है.

कोरोना वायरस की वैक्सीन बन जाने से महामारी एक झटके में ख़त्म तो नहीं होगी लेकिन तब लॉकडाउन का हटाया जाना ख़तरनाक नहीं होगा और सोशल डिस्टेंसिंग के प्रावधानों में ढिलाई मिलेगी.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कोरोना वायरस के पहले मामले की पुष्टि 31 दिसंबर 2019 को हुई थी. जिस तेज़ी से वायरस फैला उसे देखते हुए 30 जनवरी 2020 को इसे पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया गया.

लेकिन शुरुआती वक्त में इस वायरस के बारे में अधिक जानकारी नहीं थी और इस कारण इसका इलाज भी जल्द नहीं मिल पाया.

विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत कई देशों में डॉक्टर इससे निपटने के लिए वैक्सीन बनाने में जुटे हैं लेकिन सवाल यही है कि आख़िर इसके तैयार होने में कितना वक़्त लगेगा?

कब तक बन पाएगा कोरोना का वैक्सीन?

Video captionCorona Virus का Vaccine कब बनेगा और इसमें इतना समय क्यों लग रहा है?

किसी भी बीमारी का वैक्सीन विकसित होने में सालों का वक्त लगता है. कई बार दशकों का समय लगता है. लेकिन दुनिया भर के रिसर्चरों को उम्मीद है कि वे कुछ ही महीनों में उतना काम कर लेंगे जिससे कोविड-19 का वैक्सीन विकसित हो जाएगा.

कोरोना वायरस कोविड 19 को लेकर बेहद तेज़ गति से काम चल रहा है और टीका बनाने के लिए भी अलग-अलग रास्ते अपनाए जा रहे हैं.

ज़्यादातर एक्सपर्ट की राय में 2021 के मध्य तक कोविड-19 का वैक्सीन बन जाएगा यानी कोविड-19 वायरस का पता चलने के बाद वैक्सीन विकसित होने में लगने वाला समय 18 महीने माना जा रहा है.

अगर ऐसा हुआ तो यह एक बहुत बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि होगी, लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि वैक्सीन पूरी तरह कामयाब ही होगी.

Video captionCOVER STORY: कोरोनावायरस से कैसे बचें?

अब तक चार तरह के कोरोना वायरस पाए गए हैं जो इंसानों में संक्रमण कर सकते हैं. इन वायरस के कारण सर्दी-खांसी जैसे लक्षण दिखते हैं और इनके लिए अब तक कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है.

अभी कितना कुछ करना बाक़ी है?

कोविड-19 की वैक्सीन को तैयार करने की तमाम कोशिशें चल रही हैं. लेकिन अभी भी इस दिशा में काफ़ी कुछ किए जाने की ज़रूरत है.

वैक्सीन तैयार होने के बाद पहला काम इसका पता लगाना होगा कि यह कितनी सुरक्षित है. अगर यह बीमारी से कहीं ज़्यादा मुश्किलें पैदा करने वाली हुईं तो वैक्सीन का कोई फ़ायदा नहीं होगा. रूस की वैक्सीन को इसी पहलू के चलते शंका के साथ देखा जा रहा है.

क्लीनिकल ट्रायल में यह देखा जाना होता है कि वैक्सीन कोविड-19 को लेकर प्रतिरोधी क्षमता विकसित कर पा रही है ताकि वैक्सीन लेने के बाद लोग इसकी चपेट में ना आएं.

वैक्सीन तैयार होने के बाद भी इसके अरबों डोज़ तैयार करने की ज़रूरत होगी. वैक्सीन को दवा नियामक एजेंसियों से भी मंजूरी लेनी होगी.

ये सब हो जाए तो भी बड़ी चुनौती बची रहेगी, दुनिया भर के अरबों लोगों तक इसकी खुराक पुहंचाने के लिए लॉजिस्टिक व्यवस्थाएं करने का इंतज़ाम भी करना होगा.

Image copyrightEPAकोरोना वायरस

ज़ाहिर है इन सब प्रक्रियाओं को लॉकडाउन थोड़ा धीमा करेगा. एक दूसरी मुश्किल भी है अगर कोरोना से कम लोग संक्रमित होंगे तो भी इसका पता लगाना मुश्किल होगा कि कौन सी वैक्सीन कारगर है.

वैक्सीन की जांच में तेज़ी लाने का एक रास्ता है कि पहले लोगों को वैक्सीन दिया जाए और उसके बाद इंजेक्शन के ज़रिए कोविड-19 उनके शरीर में पहुंचाया जाए. लेकिन यह तरीका मौजूदा समय में बेहद ख़तरनाक है क्योंकि कोविड-19 का कोई इलाज़ मौजूद नहीं है.

कितने लोगों को वैक्सीन देने की ज़रूरत होगी?

वैक्सीन कितना कारगर है, यह जाने बिना इसका पता नहीं चल पाएगा. हालांकि कोविड-19 संक्रमण को रोकने के लिए यह माना जा रहा है कि 60 से 70 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन देने की ज़रूरत होगी.

हालांकि अगर वैक्सीन कारगर हुआ तो इसे दुनिया भर की आबादी को देने की ज़रूरत होगी.

कैसे बनती है वैक्सीन?

इंसानी शरीर में ख़ून में व्हाइट ब्लड सेल होते हैं जो उसके रोग प्रतिरोधक तंत्र का हिस्सा होते हैं.

बिना शरीर को नुक़सान पहुंचाए वैक्सीन के ज़रिए शरीर में बेहद कम मात्रा में वायरस या बैक्टीरिया डाल दिए जाते हैं. जब शरीर का रक्षा तंत्र इस वायरस या बैक्टीरिया को पहचान लेता है तो शरीर इससे लड़ना सीख जाता है.

इसके बाद अगर इंसान असल में उस वायरस या बैक्टीरिया का सामना करता है तो उसे जानकारी होती है कि वो संक्रमण से कैसे निपटे.

दशकों से वायरस से निपटने के लिए जो टीके बने उनमें असली वायरस का ही इस्तेमाल होता आया है.

मीज़ल्स, मम्प्स और रूबेला (एमएमआर यानी खसरा, कण्ठमाला और रुबेला) टीका बनाने के लिए ऐसे कमज़ोर वायरस का इस्तेमाल होता है जो संक्रमण नहीं कर सकते. साथ ही फ्लू की वैक्सीन में भी इसके वायरस का ही इस्तेमाल होता है.

Image copyrightREUTERSकोरोना वायरस

लेकिन कोरोना वायरस के मामले में फिलहाल जो नया वैक्सीन बनाया जा रहा है उसके लिए नए तरीक़ों का इस्तेमाल हो रहा है और जिनका अभी कम ही परीक्षण हो सका है. नए कोरोना वायरस Sars-CoV-2 का जेनेटिक कोड अब वैज्ञानिकों को पता है और अब हमारे पास वैक्सीन बनाने के लिए एक पूरा ब्लूप्रिंट तैयार है.

वैक्सीन बनाने वाले कुछ डॉक्टर कोरोना वायरस के जेनेटिक कोड के कुछ हिस्से लेकर उससे नया वैक्सीन तैयार करने की कोशिश में हैं. कई डॉक्टर इस वायरस के मूल जेनेटिक कोड का इस्तेमाल कर रहे हैं जो एक बार शरीर में जाने के बाद वायरल प्रोटीन बनाते हैं ताकि शरीर इस वायरस से लड़ना सीख सके.

क्या सभी उम्र के लोग बच पाएंगे?

माना जा रहा है कि वैक्सीन का ज़्यादा उम्र के लोगों पर कम असर होगा. लेकिन इसका कारण वैक्सीन नहीं बल्कि लोगों की रोग प्रतरोधक क्षमता से है क्योंकि उम्र अधिक होने के साथ-साथ व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती जाती है.

हर साल फ्लू के संक्रमण के साथ ये देखने को मिलता है.

Image copyrightAFPकोरोना वायरस

सभी दवाओं के दुष्प्रभाव भी होते हैं. बुख़ार के लिए आम तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली पैरासेटामॉल जैसी दवा के भी दुष्प्रभाव होते हैं.

लेकिन जब तक किसी वैक्सीन का क्लिनिकल परीक्षण नहीं होता, ये जानना मुश्किल है कि उसका किस तरह से असर पड़ सकता है.

किनको मिलेगी सबसे पहले वैक्सीन?

अगर वैक्सीन विकसित हो जाए तो भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि सबसे पहले वैक्सीन किनको मिलेगी? क्योंकि शुरुआती तौर पर वैक्सीन की लिमिटेड सप्लाई ही होगी. ऐसे वैक्सीन किसको पहले मिलेगी, इसको भी प्रायरटाइज किया जा रहा है.

कोविड-19 मरीज़ों का इलाज करने वाले स्वास्थ्यकर्मी इस सूची में टॉप पर हैं. कोविड-19 से सबसे ज़्यादा ख़तरा बुज़ुर्गों को होता है, ऐसे में अगर यह बुज़ुर्गों के लिए कारगर होता है तो उन्हें मिलना चाहिए.

जब तक वैक्सीन नहीं बनती तब तक...

ये बात सच है कि टीका व्यक्ति को बीमारी से बचाता है, लेकिन कोरोना वायरस से बचने का सबसे असरदार उपाय है अच्छी तरह साफ़-सफ़ाई रखना. सोशल डिस्टेंसिग के प्रावधानों को पालना करना.

आपको यह भी ध्यान रखना है कि अगर आपको कोरोना वायरस संक्रमण हो भी जाता है तो 75 से 80 प्रतिशत मामलों में यह मामूली संक्रमण की तरह ही होता है.

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