जानिए क्यों किसान कृषि बिल का विरोध कर रहे हैं........

November 27, 2020

 Reasons why Punjab and Haryana Farmers Opposing the Agriculture Bill 2020 :


1. The Farmers' Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Act, 2020 (कृषि उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण) एक्ट, 2020)

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यह कानून मंडी सिस्टम को बायपास करता है, और मंडियों से बाहर कहीं भी उत्पाद बेचने की छूट देता है। इसमें यह भी लिखा है कि बाहर खरीदने/बेचने पर कोई टैक्स नहीं लगेगा जो मंडियों में लगता है। इस से सभी आढ़ती मंडियों से बाहर खरीदने लगेंगे और धीरे धीरे मंडी खत्म हो जाएगी। मंडियों के खत्म होने से न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP भी अपने आप अप्रासंगिक हो जाएगा। हमारी मांग है कि सरकार कानून लाये कि मंडी या मंडी से बाहर MSP से नीचे खरीद गैरकानूनी होगी।
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2. The Farmers (Empowerment and Protection) Agreement of Price Assurance and Farm Services Bill, 2020 (कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार एक्ट, 2020
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यह कानून कॉन्ट्रेक्ट खेती के लिए लाया गया है। वैसे इसमे अच्छी बात ये है कि किसी भी एग्रीमेंट में प्रॉपर्टी ट्रांसफर नहीं होगी। खराब बात ये है कि ये विवाद के मामले में किसानों को सिविल केस दायर करने से रोकता है, एग्रीमेंट वायलेशन होने पर मामलों की सुनवाई एसडीएम करेगा जिसकी अपील डीएम के पास होगी। किसानों का डर है कि ये एग्रीमेंट फसल बीमा के एग्रीमेंट की तरह हो सकते है, जिनमे बड़ी कंपनियां अफसरों के साथ मिलकर किसान को परेशान करेगी।
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ये किसान को उसकी जमीन पर बंधुआ भी बना सकता है। मान लो कंपनी ने किसान से करार किया कि आप ये फसल बोनी है, हम इसको इस रेट पर खरीदेंगे, इसकी क्वालिटी ऐसी होनी चाहिए। तो इनमें इस तरह के केस आ सकते है जैसे क्वालिटी कम होने पर कंपनी पूरे पैसे नहीं देगी क्योंकि क्वालिटी कम होना एग्रीमेंट की शर्तों का उल्लंघन हो जाएगा। अगर कंपनी ने एडवांस में पैसा दे रखा होगा तो कंपनी किसान को अगली फसल के लिए भी बाध्य कर सकती है , क्योंकि कंपनी का पहले का पैसा किसान दे नही पायेगा , इस हालत में वो मज़बूरी में अगली फसल का कॉन्ट्रेक्ट कर लेगा तो इनके ऋण के चक्कर मे फंस जाएगा। ऐसे में अपने पैसे की वसूली के लिए कंपनी सिविल वाद ले आएगी और जमीन नीलाम करवा देगी।
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इसलिए हमारी डिमांड है कि इसमें किसानों को ज्यादा सुरक्षा के प्रावधान किये जायें, ताकि वो बड़ी बड़ी कंपनियों के सामने कानूनी तौर पर मज़बूती से खड़ा रह सके। उसके लिए मुफ़्त कानूनी सहायता का प्रावधान हो। ऋण से भी सुरक्षा प्रदान की जाए। फसल की क्वालिटी एग्रीमेंट के हिसाब से न होने पर, नुकसान का हिस्सा कंपनी भी उठाएं, ऐसे जरूरी प्रावधान किए जाए। क्योंकि एग्रीमेंट के लिए किसान के पास न तो कानूनी जानकारी होती है जो वो एग्रीमेंट के टर्म अपने हिसाब से लिखवा सके। कंपनियों के पास लीगल एक्सपर्ट होते है। इसलिए किसान को पहले से ही ज्यादा सुरक्षा की जरूरत है।
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3. Essential Commodities Amendment Act 2020 (जरूरी वस्तु संसोधन अधिनियम 2020)
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ये तीसरा कानून आनाज , दाल आदि रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी को छूट देता है। इसको किसानों के लिए बताया जा रहा है, जबकि हम सबको पता है किसान अभी भी स्टॉक कर सकता था, पर उसकी हालत मजबूरी ऐसी है कि वो स्टॉक कर ही नही सकता। इसलिए ये कानून बड़े धन्ना सेठों को जमाखोरी की छूट देगा जिससे वे मार्केट में इन चीजों की कमी करके रेट बढ़ाएंगे। और मुनाफा कमाएंगे। इस से हर गरीब और मध्यम वर्ग को नुकसान होगा।
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उम्मीद है इब सबकै समझ मै आगी होगी पूरी कहाणी...


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